रायगढ़। अपात्रों के नाम पर प्राथमिकता और अंत्योदय राशनकार्ड बनाए जाने का खुलासा होने के बाद राज्य सरकार इसका इलाज ढूंढऩे में लगी है। जिलेवार आंकड़ा देखने पर एक खास तरह का पैटर्न दिखाई देता है। टॉप चार जिलों में सक्ती, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले हैं। इन चारों जिलों के क्लस्टर में ही सबसे ज्यादा गड़बड़ी क्यों हुई है? प्रदेश के हर जिले की तासीर अलग-अलग है। व्यापार से लेकर घपले भी अलग-अलग तरह से होते हैं। प्रदेश में बांटी गई चुनावी रेवड़ी में राशनकार्ड बनाने का वादा भी एक है। अपात्र होने की जानकारी होने के बावजूद जनपद पंचायतों और नगरीय निकायों में जनप्रतिनिधि राशनकार्ड बनवाते रहे। यही कारण है कि 6 लाख सालाना से ज्यादा आय, 25 लाख टर्न ओवर वाली कंपनी चलाने वाले और कंपनी में डायरेक्टर बनाए गए लोगों के पास भी प्राथमिकता और अंत्योदय राशनकार्ड हैं रायगढ़ जिले में इनकी संख्या 1.61 लाख है। टॉप तीन जिलों की बात करें तो सक्ती में 3,04,850, जांजगीर-चांपा में 2,40,381, रायगढ़ में 1,71,491, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 1,66,987 और पांचवां रायपुर में 1,64,163 संदिग्ध सदस्य पाए गए थे। इनका भौतिक सत्यापन किया जाना है। एक तरह से देखा जाए तो टॉप फाइव जिलों में एक जैसा पैटर्न है। चारों जिले आपस में जुड़े हुए हैं। एक तरह से चार जिलों का क्लस्टर ही है, जहां सबसे ज्यादा अपात्र चिह्नित हुए हैं। चुनावों के दौरान गांवों और शहरों में सबसे बड़ा वादा प्राथमिकता और अंत्योदय राशन कार्ड का होता है। चुनाव जीतने के बाद सरपंच हो या पार्षद, वह बिना देखे लोगों के राशनकार्ड बनाने के लिए दबाव डालता है। राजनीतिक दखल की वजह से हालात ऐसे हो गए हैं कि अपात्रों को डाटाबेस से हटाने का साहस राज्य सरकार भी नहीं कर पा रही है। केंद्र सरकार ने इस मामले में जल्द से जल्द निराकरण करने को कहा है।
रायगढ़ में खरसिया नंबर वन
अपात्रों के प्राथमिकता और अंत्योदय राशनकार्ड बनाने के कारण ऐसा हाल हुआ है। तय नियमों को अनदेखा कर लोगों के कार्ड बनाए गए हैं। गरीब दिखने की होड़ सी मची है। जबकि आधार नंबर, बैंक एकाउंट, मोबाइल नंबर, पैन कार्ड से किसी भी व्यक्ति की आय, टांजेक्शन आसानी से पता चल जाती है। पिछले विधानसभा चुनावों के पहले और बाद में धड़ल्ले से कार्ड बनाए जा रहे हैं। खरसिया, पुसौर, धरमजयगढ़ ओर रायगढ़ इस मामले में सबसे आगे हैं। रायगढ़ जिले में प्राथमिकता कार्ड 2,24,358 और अंत्योदय कार्ड 66,310 हैं। खासकर अंत्योदय कार्ड की संख्या बहुत ज्यादा है।

